रूपये को और गिरने से रोकने के लिए सरकार ने उठाये दो बड़े कदम, एक तो ये कि…

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अमेरिका में हुए कुछ नये नीतिगत फैसलों के मद्देनजर डॉलर मजबूत हुआ है जिसके कारण पिछले कुछ दिनों से रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हुआ है. पेट्रोल-डीजल के दामों में आ रही वृद्धि का एक कारण रूपये का गिरना भी है. यह गिरावट भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. इसके लिए मोदी सरकार ने एक बैठक बुलाई जिसमें इन सारी परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए चर्चा हुई.

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए जरुरी क़दमों पर चर्चा हुई. इस बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली, रिजर्व बैंक के गवर्नर भी मौजूद रहे. बैठक में रूपये को और गिरने से रोकने के लिए फैसला किया गया कि विदेशों से कर्ज लेने में थोड़ी ढील दी जाएगी और आयात हो रहे गैर-जरुरी सामानों पर पाबंदी लगाई जाय.

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सरकार को भरोसा है कि ऐसे क़दमों से रूपये की हालत में सुधार लाया जा सकता है. अर्थव्यवस्था को लेकर देश में कैसी स्थिति है इसकी जानकारी RBI के गवर्नर उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालयों के आधिकारियों ने पीएम मोदी को दी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि, ‘इस फैसले का मकसद चालू खाते में हो रहे घाटे पर रोक लगाना और विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाना है. गैर जरूरी आयातों पर पाबंदी लगेगी और साथ ही निर्यात को प्रोत्साहित करेगी सरकार.’

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हालाँकि ये भी सच है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में अर्थवयवस्था के मामले में भारत दुनिया का पांचवा देश बन चुका है. ऐसे में रूपये की गिरावट और तेल के दामों में वृद्धि से देश की अर्थवयवस्था पर जरूर असर पड़ा है लेकिन मोदी सरकार ने इसके लिए जरुरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और उम्मीद है कि जल्द ही इसपर काबू पा लिया जायेगा.