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‘मोदी-शाह’ की जोड़ी ने खेला है ऐसा दांव कि आगामी चुनाव में कांग्रेस के छक्के छूट जायेंगे, पूरा मामला जानकर आप भी…

कांग्रेस भले ही विभिन्न मुद्दों को लेकर पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हो लेकिन ऐसा लग रहा है कि यह कांग्रेस के लिए सेल्फ गोल साबित हो रहा है. कांग्रेस विपक्ष के नाते जिन भी मुद्दों को उठाती है वह भाजपा के लिए ही वरदान साबित हो रहे हैं. दरअसल पीएम मोदी और अमित शाह ऐसे दांव चल रहे हैं कि कांग्रेस को कोई मौका ही नही मिल रहा है. कांग्रेस के पास कई ऐसे मुद्दे हैं जिनको लेकर वह केन्द्र की भाजपा सरकार पर हमलावर हो सकती है लेकिन मोदी-शाह के दांव में उलझ कर वह खुद ही बैकफुट में है. आइए बताते हैं क्या हैं ये मुद्दे.

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह: (Image Source-Punjabkesari)

मुद्दे जिन पर कांग्रेस खुद ही फंसी हुई लग रही है

विजय माल्या-अरुण जेटली मुद्दा

विजय माल्या की अरुण जेटली से मुलाकात को लेकर कांग्रेस ने हाय-तौबा मचानी शुरु कर दी है. यहां तक की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से इस्तीफे की भी मांग कर डाली. लेकिन बीजेपी ने जो दांव खेला है उसे कांग्रेस समझनेे में असमर्थ रही है. कांग्रेस को यह नही समझ रही कि विजय माल्या जिस समय भारत से भागा वह राज्यसभा सासंद था और अरुण जेटली क्या उसे प्रधानमंत्री तक से मिलने  की छूट थी. माल्या के अरुण जेटली से मुलाकात पर सवाल उठाना कांग्रेस की ही बेवकूफी होगी.

विजय माल्या औऱ अरुण जेटली: (Image Source-punjab kesari)

 

बैंको का एनपीए 

बैंको के एनपीए का मुद्दा भी इस समय कांग्रेस जोर-शोर से उठा रही है. एनपीए बैकों द्वारा लोन देने के बाद वह राशि होती है जिसके लौटने की कोई उम्मीद नही रह जाती. कांग्रेस इस मुद्दे पर आक्रामक है औऱ मोदी सरकार पर आरोप मढ़ रही है लेकिन रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने संसदीय समिति को दिए जवाब में जो कहा है वह कांग्रेस के होश उड़ा देगा.  उन्होंने कहा है कि सबसे अधिक ‘बैड लोन’ कांग्रेस के शासन काल में 2006-08 के बीच दिए गए.

एनपीए को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर बड़ा हमला किया था: (Image Source-punjabkesari)

 

सर्जिकल स्ट्राइक 

2016 में जम्मू-कश्मीर में हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर भी कांग्रेस ने खूब हाय-तौब मचाई थी. भारतीय सेना ने पाक कब्जे वाले कश्मीर में जाकर कई आतंकवादियों को मार गिराया था. उस समय देश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया था लेकिन कांग्रेस ने इसे फर्जी करार देते हुए इसे खून की दलाली कहा था.  मोदी सरकार का विरोध करते-करते कांग्रेस ने सेना पर ही सवाल खड़े कर दिये थे इसके बाद कांग्रेस की जमकर किरकिरी हुई थी.

 

 

जम्मू-कश्मीर में हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर भी कांग्रेस ने बेवजह राजनीति की: (Image Source-Image Source-PunjabKesari)

 

एनआरसी 

एनआरसी के मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस ने बीजेपी पर जबरदस्त हमला बोला था लेकिन वह लोगों को यह समझाने मेें नाकामयाब रही कि उससे उनको क्या फायदा या नुकसान हो सकता है. दरअसल असम में घुसपैठियों से निजात पाने के लिए नागरिकों का सत्यापन शुरु किया गया था. फाइनल ड्राफ्ट तैयार होने के बाद करीब 40 लाख घुसपैठिये निकले इसको लेकर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने की खूब कोशिश की लेकिन बाद में बैकफुट पर आ गई. बीजेपी लोगों को यह समझाने में कामयाब रही कि यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में तैयार हुआ है और जो लोग इसका विरोध कर रहें हैं वह बाहरी घुसपैठियों के समर्थक हैं.

असम में एनआरसी मुद्दे पर भी कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा: (Image Source-Punjab kesari)

 

ईवीएम मशीन 

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने 2017 में बीजेपी पर आरोप लगाया था कि लगातार कई राज्यों में उसकी जीत का कारण ईवीएम में हो रही गड़बड़ी है. लेकिन चुनाव आयोग ने जब इन पार्टियों को चैलेंज किया कि वह ईवीएम को हैक कर बतायें की गड़बड़ी कैसे हो सकती है तो किसी भी पार्टी की हिम्मत नही हुई. यहां भी कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों को बैकफुट पर आना पड़ा.

ईवीएम मशीन को लेकर भी कांग्रेस ने हाय-तौबा मचाई थी: (Image Source-punjab kesari)

 

कांग्रेस इन मु्द्दों को लेकर मोदी सरकार को घेरने की काफी कोशिश कि लेकिन वह भुनाने में नकामयाब रही है. कांग्रेस की यह कमजोरी आने वाले लोकसभा चुनाव में उसके लिए सेल्फ गोल साबित हो सकते हैं.

आपसे एक सीधा सवाल-

आप इन मुद्दों को लेकर क्या सोचते हैं?

News Source-punjabkesari

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